Friday, October 4, 2019

ग़ज़ल

यादे माज़ी मुझे इकाई दे
मेरे अहसास को तनहाई दे
तोड़ कर  मुझसे ख़ून का रिश्ता
मेरा हिस्सा न, मुझको भाई दे
अपना परबत मुझे बनना है
एक इक करके मुझको राई दे
मां ने बोला परीशां बेटे से
बाप के हाथ में कमाई दे
सर्द मौसम है बेमकानों को
धूप की शक्ल में रज़ाई दे
ए शबे हिज़्र जाग जाना तू
उसकी आवाज़ जब सुनाई दे